पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/१९१

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( १७६ । दाँत, दिशाएँ (पूर्व, पश्चिम, उत्तर. दक्षिण ), सेना की चार (शकट, क्रौंच धनुष, चक्र) प्रकार की रचना, चरण (छद के) और पदार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष ) ये चार सख्या के सूचक है। पॉच सूचक ___ दोहा पंडु पूत, इद्रिय, कवल, रुद वदन, गति, बाण । लक्षण पंच पुराणके, पच अंग अरु प्राण ॥१२॥ पंचवर्ग तर पंच अरु, पच शब्द परमान । पंच सधि पचाग्नि भनि, कन्या पंच समान ॥१३॥ पंचभूत पातक प्रकट, पंचयज्ञ जिय जानि । पचगव्य, माता, पिता, पंचामृतन बखानि ॥१४॥ पाण्डु के पुत्र, इद्रियाँ ( , कर्म, ५ ज्ञान । कवल ( भोजन के आरम्भ के पाच कौर , श्री शकर जी के मुख, गति सालोक्य सामिप्य सारुप्य, सायुज्य, सारिष्ट), बाण, पुराण के पांच ( सृष्टि की उत्पति, प्रलय देवताओ की उत्पत्ति और वशपरम्परा, मन्वन्तर और मनुवश का विस्तार वर्णन लक्षण, पचाग तिथि वार, नक्षत्र, योग और करण), पच (प्राण, अपान, व्यान, उदान और समान ) प्राण, पच (क, च, ट, त, और प) वर्ग पच ( मदार, पारिजात, सतान कल्पवृक्ष और हरि चदन ) तरु, पच सूत्र, वार्तिक, भाष्य, कोश और कवि प्रयोग) शब्द, पच | स्वर, व्यजन, विसर्ग, स्वादि और प्रकृतिभाव] सधि, पच (अन्वहार्य, पचन, गार्हपत्य, आह्वनीय और सभ्य) अग्नि, पच (अहल्या द्रौपदी, कुन्ती, तारा और मदोदरी) कन्या, पच (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) भूत, पातक (ब्रह्महत्या, सुरापान, स्वर्ण चोरी, गुरु शय्या गमन और इनका सग ), पच (ब्रह्म, देव, पितृ भूत और नर) यज्ञ पच ( दूध, दही, घी, गोबर और मूत्र ) गव्य, पच (जननी, गुरुपत्नी, राजपत्नी, सास और मित्र-पत्नी) मावा, पच (जनक, यज्ञोपवीतदाता,