पृष्ठ:कवि-प्रिया.djvu/२०४

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( १८७ ) चार अर्थ का श्लेष कवित्त दानवारि सुखद, जनक जातनानुसारि, ___ करषत धनु गुन सरस सुहाये हैं । नरदेव क्षयकर करम हरन, खर, दूषन के दूषन सु केशोदास गाये हैं। नागवर प्रियमानि, लोकमाता सुखदानि, सोदर सहायक नवल गुन गाये है। ऐसे राजा राम, बलराम, कै परशुराम, कैथो है अमरसिह मेरे उर भाये हैं ॥३२॥ पहला अर्थ श्रीराम चन्द्र पक्ष जो दानवो के वैरी इन्द्र को सुख देने वाले है, जो राजा जनक की यातना मानसिक पीडा, चिन्ता ) का विचार कर धनुष की प्रत्यचा को खींचते समय अत्यन्त सुशोभित हुए । जो मनुष्य तथा देवताओ का नाशक रावण के कर्मों को हरने वाले और खर-दूषण राक्षसो को मारने वाले है । 'केशव' कहते है कि उनके गुणानुवाद उनके दासो ( भक्तो ) द्वारा गाये गये है। जो नागधर ( श्रीशकर जी ) को प्रिय मानते है और लोक माता श्री लक्ष्मी जी को सुख देने वाले है । जिनके सगे भाई (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न सदा सहायक हुए और जिनके सुन्दर गुणो का सबने वर्णन किया है । ऐम गुणो वाले राजा रामचन्द्र है या बलराम जी है, या परशुराम जी है या राजा अमरसिंह है जो मेरे मन को अच्छे लगते हैं। दूसरा अर्थ श्रीबलराम पक्ष जो दानवीर (श्रीकृष्ण) को सुख देने वाले और जनक ( पिता ) की यातना को दूर करने के लिए, अनुकूल आचरण करने वाले है ।