पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/११

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पाठकों के लिए


अधिकार है, लेकिन हमें केवल ज्ञान का इस्तेमाल करने से ज्यादा कुछ और भी करना चाहिए। हम सभी को समाजिक ज्ञानपुंज में योगदान भी करना चाहिए।


हम दोनों, तकनीकी क्षेत्र के लोग हैं। हमने पूरी जिंदगी दूरसंचार और कम्प्यूटर में काम कर के बिताये हैं। इंटरनेट एक ऐसा चमत्कार है जिसने दुनिया को बदल दिया है। लेकिन इसकी और भी अधिक करने की क्षमता है। परन्तु हम, हमारे जैसे अनेक तकनीकी लोगों को देखते हैं जो नए ऐप (App) पर काम कर रहे हैं या विज्ञापन के क्लिकों (Ad Clicks) को बढ़ाने में लगे हैं।


जैसे-जैसे व्यापार की दुनिया, मध्यस्थता (arbitrage) और एकाधिकार (monopoly) के जरिये निजी फायदे को बढ़ाती जाती है वैसे-वैसे दुनिया और भी असमान होती जाती है। हम आशा करते हैं कि हमारे क्षेत्र में काम कर रहे सहकर्मी लोग, सार्वजनिक काम करने के लिए कछ समय निकालेंगे और गांधीजी के विचारों से प्रेरित होकर हमारी दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में मदद करेंगे। एक ऐसी जगह जो सिर्फ निजी लाभ पर नहीं, बल्कि समाज के हित के लिए काम करने पर भी ध्यान देगी।


कुछ लोगों को सूचना को डेमोक्रेटाईज़ करना, हवा में बात करने जैसा लग सकता है, जो शायद इन समस्या की घड़ी में, गंभीर लोगों द्वारा किया जाने वाला महत्वपूर्ण काम नहीं है। एक संशयात्मक संपादक यह पूछ सकता है कि जब लोग भूखे हैं और हमारा ग्रह नष्ट हो रहा है तो हम कंप्यूटर और नेटवर्क पर कैसे ध्यान दे सकते हैं?


हमारे पास इसके दो जवाब हैं। सबसे पहले यह कि, कंप्यूटर और नेटवर्क हमारे काम का क्षेत्र है। सभी अपनी दुनिया में जो कुछ कर सकते हैं, वे करते हैं। लेकिन हमारा असली । जवाब यह है कि ‘ज्ञान तक पहुंच (access to knowledge)' तरक्की के इमारत की आधार शिला है। सूचना को सार्वजनिक (डेमोक्रेटाईज़) करना तरक्की के उद्देश्य को पूरा करने का ज़रिया है, जिसके ही नींव पर हम सभी तरक्की की इमारत खड़ी कर सकते हैं।


यदि हम इस नींव को रखते हैं, तो हमारा मानना है कि हम अपनी दुनिया का पुनिर्माण कर सकते हैं, जैसा हमसे पहले कई लोगों ने पुराने समय में दुनिया को फिर से बनाया था। हम अपनी वित्तीय प्रणाली की गहरी खामियों को बदल सकते हैं, जो सार्वजनिक लाभ के बजाय केवल कुछ लोगों के पास सभी संसाधनों को इकट्ठा करने में मदद करती है। हम स्वास्थ्य, परिवहन, भोजन और आश्रय को प्रदान करने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। हम अपने बच्चों को और खुद को शिक्षित करने के तरीकों में भी क्रांतिकारी बदलाव ला । सकते हैं। हमारी सरकारों के काम करने के तरीकों में बदलाव ला सकते हैं। हम अपने ग्रह की देखभाल करना आरम्भ कर सकते हैं। सूचना को सार्वजनिक (डेमोक्रेटाइज़) करने से दुनिया बदल सकती है। ज्ञान को वि-उपनिवेशीकरण (डीकोलोनाइजेशन) करने से दुनिया बदल सकती है। आइए हम उस यात्रा पर एक साथ चलें।

कार्ल मालामुद और सैम पित्रोदा

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