पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/४३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ जाँच लिया गया।


डॉ.सैम पित्रोदा की टिप्पणियां

और हमें नई प्रक्रियाओं की आवश्यकता है। कुछ बदलाव तो हो रहा है, लेकिन जिस गति से होनी चाहिए उस गति से नहीं हो रहा है।

जब हम ज्ञान अर्थव्यवस्था को देखते हैं तो हम अनुभव करते हैं कि ज्ञान वास्तव में भविष्य के लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। आज, लोकतंत्र के तीन स्तंभ हैं: कार्यपालिका, न्यायपालिका, और विधायिका।

हम आश्वस्त हैं कि ज्ञान और सूचना भविष्य के लोकतंत्र की कुंजी है। यद्यपि इस संदेश को प्रभावी ढंग से बड़ी संख्या में लोगों को नहीं पहुंचाया गया है। आज, एक तरफ, हमारे पास वे सभी कानून हैं जो अभाव की अर्थव्यवस्था economy of scarcity) पर आधारित हैं, जबकि हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां हमारे पास प्रचुरता की अर्थव्यवस्था (economy of abundance) है।

उदाहरण के लिये, भारत में हम पर्याप्त मात्रा में खाद्य पदार्थ का उत्पादन करते हैं। बहुत ज्यादा समय पहले की बात नहीं है, जब दुनिया के लोग कहा करते थे कि भारत 60 करोड़ लोगों को नहीं खिला पाएगा। भारत को बास्केट केस (अन्न के लिए झोली पसारने वाला देश) माना जाता था। पर आज न केवल भारत 120 करोड़ लोगों को खाना खिला सकता है,बल्कि भारत के पास अतिरिक्त अनाज भी है। ऐसे समय में भी, लगभग 20 करोड़ लोग। भारत में भूखे हैं क्योंकि हमने माल संभार (logistics) के लिये सूचना प्रौद्योगिकी का सही इस्तेमाल नहीं किया ताकि सही समय पर सही लोगों को रसद प्राप्त हो जाय।

ये ऐसी चुनौतियां हैं जिनके लिए नई मानसिकता और नई सोच की आवश्यकता है।

यह सचमच मझे उस दिशा में ले जाता है, जहाँ मैं कछ समय से काम कर रहा हूं। मेरा मानना है कि दुनिया को अनिवार्य रूप से पुनः डिज़ाइन करने की आवश्यकता है।

कार्ल और मैं, लगभग दो वर्षों से इस पर बात करते आ रहे हैं। दुनिया को पिछली बार अमेरिका ने द्वितीय विश्व यद्ध के बाद डिज़ाइन किया गया था जब विश्व बैंक, आई.एम.एफ नाटो, डब्ल्यू.टी.ओ, जी.डी.पी, जी.एन.पी, वैयक्तिक आय, भुगतान संतुलन, व्यापार घाटा, आदि जैसे संकेतकों/सूचकों के आधार पर तैयार किया गया और देखा जाने लगा।

उस डिजाइन को तैयार किए जाने के कुछ ही वर्ष बाद, 20 साल की छोटी अवधि में ही दुनिया से उपनिवेशवाद समाप्त हो गया। चीन के शासक देंग ज़ियाओ पिंग ने कहा कि, “मैं पूँजिवाद और साम्यवाद को जोड़ रहा हूँ”। सोवियत संघ में गोर्बाचेव आए और वे सोवियत संघ की जरूरतों के एकदम विपरीत बोले। वे अपने प्रयोग में असफल रहे, लेकिन वे बहुत से छोटे छोटे देशों की ऊर्जा को रिलीज करने में सफल रहे।

सभी लोग लोकतंत्र, स्वतंत्र बाजार, पूंजीवाद, मानवाधिकारों की सम्मान की आकांक्षाओं के साथ आये, जो दुनिया के पुराने डिजाइन की बुनियादी मान्यताएं थीं। वह डिजाइन अमेरिका के लिए बहुत अच्छी तरह से काम किया है। यह ऐसी मान्यताएं हैं, जो विश्व के

35