पृष्ठ:कोड स्वराज.pdf/९

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पाठकों के लिए


गत् दो वर्षों में हमारे द्वारा दिए गए भाषणों और बयानों का रिकार्ड इन फ़ील्ड नोट्स में संकलित है। इन भाषाणों में न्यूनतम सुधार किया गया है।


इस रिकॉर्ड में उस विषय की चर्चा की गई है जिसने हम दोनो को साथ लाया है और वह है भारतीय मानक (standards) पर किये गये काम। भारत सरकार द्वारा प्रकाशित मानक दस्तावेजों की संख्या 19,000 है। इन मानकों में वे तकनीकी ज्ञान शामिल हैं, जो हमारे विश्व को सुरक्षित रखने के तरीके को नियंत्रित करते हैं। वे सुरक्षा प्रदान करने के वाले कानून हैं।


भारतीय मानक, आधुनिक तकनीकी दुनिया के कई सारे विषयों के बारे में है: सार्वजनिक और निजी भवनों की सुरक्षा, कीटनाशकों से सुरक्षा, कारखानों में कपड़ा-उद्योग के मशीनों की सुरक्षा, खतरनाक सामग्रियों के परिवहन, खाद्य पदार्थों और मसालों में व्यंजनों का नियंत्रण, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के तरीके, इत्यादि।


भारत और अन्य देशों में, इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल को सीमित किया जा रहा था। जरूरतमंदों के लिए ये दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं। इन्हें कॉपीराइट के अधीन रखा गया है। इन्हें गैर अनुचित रकम पर बेचा जाता है और इन पर कड़े तकनीकी साधनों द्वारा रोक लगाई गई है। हमने उन मानकों को खरीदा, उन्हें इंटरनेट पर स्वतंत्र और अप्रतिबंधित इस्तेमाल के लिए पोस्ट कर दिया है। भारत सरकार को हमने हमारे कार्यों के बारे में पहले, पत्र द्वारा सूचित किया और फिर औपचारिक याचिका से सूचित कर दिया है।


जब सरकार ने हमें, मानकों के नए संस्करण प्रदान करने से इनकार कर दिया तो हमने नई दिल्ली के माननीय उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की। हमने इस कदम को सत्याग्रह मान कर किया है, यह आत्म-सत्य' की तलाश में एक अहिंसात्मक प्रतिरोध है। हम बिना किसी हिचकिचाहट के साथ स्वीकार करते हैं कि हम महात्मा गांधी के शिष्य हैं और भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में न्याय और लोकतंत्र के संघर्ष के इतिहास के छात्र हैं।


भारत में इंजीनियरों की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए, नागरिकों को सूचित करने के लिए, शहरों को सुरक्षित रखने के लिए, हमने यह कदम उठाया है। इसके लिए हमें कोई अफसोस नहीं है। इन दस्तावेजों को लाखों लोगों ने पढ़ा। इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि इस बहुमूल्य जानकारी को फैलाने की ज़रूरत थी।


हम इन्हीं कारणों से इस पुस्तक को “कोड स्वराज” कहते हैं। जब हम “कोड" की बात करते हैं तो हमारा मतलब उन सोर्स (source) कोड से ज्यादा है, जिससे हमारे कंप्यूटर चलते हैं, या वे प्रोटोकॉल्स (protocols) जिन पर इंटरनेट काम करता है। कोड से हमारा मतलब है कोई भी नियम-पुस्तक, चाहे ये इंटरनेट के प्रोटोकॉल्स हो या हमारे वे नियम और कानून जिससे हमारा लोकतंत्र चलता है। इसी तरह, स्वराज का सिद्धांत है स्वयं द्वारा शासन

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