पृष्ठ:खूनी औरत का सात ख़ून.djvu/५४

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खूनी औरत का


यों कहकर उसने फिर थोड़ा सा पानी पीया और सब मैने उसले यों कहा,-"कालू, यह तुमने क्या कर डाला?"

यह कहने लगा,--"तो आखिर, मैं उन सभी को यहांसे टालता कैसे ? वे सब भला यहांसे कभी टसफमेवाले थे! मैंने तो यह सोचा था कि उन तीनों को मार कर तुम्हें यहांसे भगा ले चलूंगा, पर मेरे मन की मन ही में रही और मैं भी अब चलता है। हाथ, तुम ब्राह्मण की लड़की हो और मैं तुम्हारा दहलुआ हूं। फिर भी मैने तुम पर अपनी नीयत बिगाड़ी और पूरी नमकहरामी की! अब यदि तुम अपनी उदारता से मुझे क्षमा न करोगी तो मैं नरक में भी सुख से न रह सकूँगा । इसलिये दुलारी, तुम मुझे क्षमा करो, क्योंकि मैं अप चलगे ही वाला हूं । क्षमा करो, दुलारी! तुम मेरी मां-बहन हो, इसलिये मुझ पापी को मप तुम क्षमा करो।"

यह सुनकर मैने कहा,--" कालू, तुमने काम तो बड़ा खोटा किया है; पर अब तुम मर रहे हो, इसलिये मैं तुम्हें क्षमा करती हूँ। पर यह तो बतलाओ फि तुममे अकेले तीन तीन आदमियों को कैसे मारा ?"

वह कहने लगा,--"रसोई-घर में आकर खाना तो चूल्हे के नीचे की धरती खोदने लगा, परसा खुदी हुई मिट्टी हटागे लगा और नब्बू रोशनी दिखलाने लगा था । बस, तुम्हारे पास से आकर मैने खाना और परसा को तो झट-पट काट डाला, पर नब्बू यह हाल देखकर मुझसे लड़ने लगा। उसने अपने हाथ फा पलीता दीवार के छेद में दोंस दिया और मुझ पर वार किया ! उसने मेरे कन्धे पर यह पड़ी भारी चोट पहुंचाई, पर गिरने के पहिले मैने भी उसके कलेजे में अपनी तल्वार आखिर घुसेड़ ही दो । बस, इसके बाद पहिले नब्बू ने धर्ती संघी और उसके बाद मैं धोरे धोरे लेट गया । बस, यही तो बात है, जो तुम्हें सुना हो गई। पामी ! पानी !! गो, दुलारी ! पानी ! पानी !! पानी !!!"