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पृष्ठ:खूनी औरत का सात ख़ून.djvu/७०

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खून औरत का


ओर बेफिक्र रही, क्यों कि मैं तुम्हारी मदद पर मुस्तैद रहूँगा और अबदुल्ला लाला तुम्हारे जिस्म में उंगली भी न लगाये पाएगा। मैं तुम्हारी हिफाजत करूँगा और सगर उस जात में तुम्हारे साथ कुछ ज्यादा करली हानी, तो इसे फौरन मार डालूंगा।"

यद सुन और घबरा कर मैंने उन से यों कहा,--सुनों, हींगन मियां! खून-खराबे की कोई जरूरत नहीं है, इसलिये तुम पैसा कोई भयानक काम न कर बैठना। हां, यह तुम कर सकते हो कि उस ( अबदुल्ला ) को खूब ढेर सी शराब पिला कर बेहोश कर दो और मुझे यहांसे कहीं ले चलो । सुनो, भई ! मेरे घर में पांच-पांच खून तो हो ही चुके हैं। इसलिये यहां अष एक खून की गिनती और पढ़े, यह मैं नहीं चाहती।"

मेरी ऐसी बात सुन कर चलते-चलते हींगन में यों कहा,- "खैर, तुम कोई भन्देशा न करो। मैं बराबर तुम्हारी मदद पर रहूँगा और जैसा मौका देखंगा, वैसा करूंगा। तुम मुझे बिल्कुल नशे में डूबा हुआ न समझना ।"

मैं बोली,--"खैर, तुम जैसे हो, बहुत अच्छे हो, लेकिन इतना मैं फिर भी तुम्हें चिताए देती हूँ कि अब तुम खुद तो जरा भी शराब न पीना, मगर अबदुल्ला को खूब पिलाना।"

इस पर वह बोला,--"अच्छा, जैसा तुम कहती हो, वैसा ही किया जायगा । जो, अभी अब झट पट चलो।

यो कह कर यह मुझे अपने आगे करके ले चला और उसके साथ मैं अबदुल्ला की हसी कोठरी में पहुंची, जिसमें मैंने सबेरे उसे देखा था।

यहां जा कर मैने क्या देखा कि एक ओर एक स्टूल पर धरी। हुई लालटेन जल रही है और हमने पोशा के ऊपर बैठा हुआ अबदुल्ला शराब पी रहा है !

मुझे देखते ही सगे हंस दिया गौर उसी तखतेपोश पर