दिया। यदि यह सच्ची खबर है, तो दीवान साहब ने ही
भागने में बाज़ी मारी। जींद की पैदल फ़ौज को कारगुज़ारी
बहुत अच्छी रही। आज हमारी पोज़ीशन (दशा) में बहुत
उन्नति हुई है। मेगज़ीन पर अधिकार कर लिया गया है, और
अब हमारा अधिकार काबुली दर्वाज़े से लेकर नहर के बरा-
वर उस फ़ौज की चौकियों सक फैल गया है, जो मेगज़ीन पर
अधिकार रखती हैं। नगर के इस तमाम भाग को निवासियों
ने खाली कर दिया है, इसलिये वहाँ से जो रुपया-पैसा मिल
सकेगा अपने क़ब्ज़े में ले लिया जायगा। पांडों की एक पर्याप्त
संख्या मारी गई और मेरा खयाल है, बहुत कम लोग बचने पाए
हैं। परंतु किसी स्त्री को आँखों देखते हानि नहीं पहुँचाई गई।
कैंप की रक्षा किशनगंज की असफलता से एक हद तक खतरे में पड़ गई थी। इस पर आक्रमण का भय था, पर हुआ नहीं। सलेमगढ़ और शाही महलों पर गोले वरसाए जा रहे हैं। मेरा खयाल है, पूरी सफलता होगी। हमारी सेना में मृत और घायलों की संख्या ८०० से कम न होगी। निकलसन की जान का भय है। इनके स्थान की पूर्ति असंभव है। कर्नल केंबल (५२वीं) भी काम के योग्य नहीं रहे। पूरे कर्नल जो रह गए हैं, उनके ये नाम हैं -- लांग्फ़ोल्ड (८वीं), जोंस (६१वीं), वेटनेस (५२वीं)। जनरल विलसन की बहुत कुछ हिम्मत बढ़ाई गई है। मिस्टर कानविन ९वीं को मर गए।