पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२७२

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संवाद-पत्रोंका इतिहास उद् अखबार Isहिन्दीके अखबारोंके विषयमें कुछ विशेष आलोचना करनेका विचार IL.जीमें आनेसे पहलेही उर्दू अखबारोंकी ओर दृष्टि जाती है, क्योंकि उर्दूके अखबार हिन्दोसे पहले जारी हुए हैं और उन्होंने हिन्दी-अखवारोंसे पहले तरक्कोके मैदानमें कदम आगे बढ़ाया है। ऊपरसे देखिये तो उद और हिन्दीमें इस समय बड़ी अनबन है। उर्दू के तरफदार हिन्दी- वालोंको और हिन्दीके पक्षवाले उर्दूवालोंको कुछ-कुछ टेढ़ी दृष्टिसे देखते हैं, पर वास्तव में उर्दू-हिन्दीका बड़ा मेल है। यहाँतक कि दोनों एक हो वस्तु कहलानेके योग्य हैं। केवल फारसी जामा पहननेसे एक उर्दू कहलाती है और देवनागरी वस्त्र धारण करनेसे दूसरी हिन्दी। अंग्रेजी सरकारने अपना अमल भारतमें जमाकर भारतकी भाषाका ईरानी लिबास पसन्द किया। उसी लिबाससे भारतकी भाषा अंग्रेजी अदालतोंमें पहुंची। पञ्जाब और पश्चिमोत्तर प्रदेशकी अदालती भाषा उ ठहरो । अदालतो भाषा होनेसे पहलेहो उर्दूपर अंग्रेजोंकी दृष्टि पड़ चुकी थी। उस बातको आज सौ सालसे अधिक हो गये। उस समय उर्दू में गद्य पुस्तक लिखनेका ढङ्ग जारी हो गया था। उर्दू पद्यकी सबसे पहली पुस्तक सन् १७६८ ई में बनी । मीर अमनकी प्रसिद्ध “बागोबहार" नामकी पोथी सन् १८०२ ई०में बनी। उसके एकही साल पीछे लल्लू