पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/२७८

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उर्दू-अखबार आरम्भ है । यह मुंशी नवलकिशोर साहबका जारी किया हुआ है । अपने आकार प्रकार और श्राफकी हैसियनसे वह उर्दू में सबसे प्रतिष्ठित पत्र है। पर उसकी पालिसीने उसके नामको अप्रसिद्ध ही रखा। एक "शममुल" अखबार मद्राज है, जो पुरानी चालका माताहिक पत्र है। इसका भी ४५वां वर्ष जारी है। अवध अखबार। कोहेनूरके बाद पुराने अग्वबारोंमें "अवध अखबार" का नाम उल्लेख करने योग्य है। यह कोहेनूरसे ६ माल पीछे लखनऊसे निकला। स्वर्गीय मुंशी नवलकिशोरने यह पत्र जारी किया था। तबसे ४५ वर्ष पूरे होनेको आये । उक्त पत्र बहुत अच्छी रीतिसे चल रहा है। समय इस पत्रके सदा अनुकूल रहा । मुंशी नवलकिशोर साहबका छापाग्वाना इन ४५ सालमें दिन परदिन उन्नति करता गया ; इसका कोई कारण न था कि उक्त प्रसके अखबारकी दशा किसी प्रकार खराब होती। "अवध अखबार" आरम्भमें साप्ताहिक था । अब भी उसका एक माताहिक एडिशन निकलता है। पर हमने इसे दैनिक ही देखा है । यह भी मालूम नहीं कि वह दैनिक कबसे है। हमको कोई २० मालसे उसके देखने और जाननेका मौका मिला है। जब स्वर्गीय पण्डित रत्न- नाथ सरशार इसके सम्पादक कहलाये और जब उक्त पत्रमें उक्त पंडितजी- का बनाया “फिसानये आजाद" नित्य नित्य दो दो वरक करके छपने लगा, उस समय लोगोंका उसकी ओर ध्यान हुआ था। उसी समयसे हम भी उक्त पत्रको देखते हैं। उस जमानेमें इसकी नामवरी भी खासी हुई थी। क्योंकि तब पुराने ढांचेके उद्देके शौकीन मौजूद थे। किस्सा पढ़ना उनकी विद्याका मुख्य लक्ष्य था। हंसी-ठट्टा-मजाक और रंगीन किस्सा-कहानी उन्हें पसन्द था। इसीसे “फिसानये आजाद" उनको [ २६१ ]