पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/३१२

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उदू-अखबार माढ़े तीन सालमें मखजनने बहुत कुछ काम किया है। उसने कई बी० ए० और एम० ए० नवयुवकोंको उईका लेखक बना दिया है और कितनों हीके जीमें उर्दू लिखने-पढ़नेका उत्साह उत्पन्न कर दिया है। अधिक अंगरेजी पढ़ मुसलमानोंको भो उर्दसे नफरत थी। वह अंगरेजीहीको अपनी इज्जत ममझते थे। उस भागते और जी चुराते थे। उनका वह ग्वयाल अब बदल गया है। मखजनके लेग्यकोंमें कितनेही बी० ए०, एम० ए० हैं । वह लोग गद्य और पद्य दोनों प्रकारके लेब लिम्वते हैं। अंगरेजी जाननेवालोंके हाथमें आनेसे पद्यकी दशा भी कुछ मुधरी है। अभी बहुत नहीं सुधरी है। ग्बर, जब सुधरनेका मार्ग मिला है तो एक दिन अच्छा सुधार भी हो जावेगा। गद्य भग्वजनने बड़ा काम किया है । पञ्जाबियोंमें ऐसे लोग बहुत कम . जो माफ उर्दू लिग्ब सकते हो। साफ उदृ बोलना भी बहुत ही कम पञ्जाबी जानते हैं। ग्वंर बोलनेक विषयमं तो कुछ कह नहीं सकते, पर लिग्वनेके विपयमं यह अवश्य कहेंगे कि मग्वजनमें लिग्वनेवाले पञ्जाबो, अच्छी उ लिग्वने लगे हैं। उनकी तहरीरसे उनका पञ्जाबोपन बहुत कम जाहिर होता है। कुछ दिनमें वह और भी उन्नति कर जावगे। शायद दो चार सालहीमें पञ्जाबियोंकी उड़े पहचानना कठिन हो जायगा। यह बात पञ्जावियोंको मखजनके कारणही नसीब हुई है। पञ्जाबियोंके सिवा हिन्दुस्थानके दूसरे प्रान्तोंके लोग मग्वजनमें लिखते हैं। बहुत लोगोंको उसने लेख लिखनेका उत्साह दिलाया है । उसके लेखकोंमें हिन्दुओंकी संख्या मुसल- मानोंकी अपेक्षा बहुत कम है, तथापि हिन्दू लेखकोंको भी उसने बहुत कुछ उत्साह दिलाया है। अब यह चाल वर्तमान उद्दे मासिक- पत्रमें भली भांति चल गई कि हिन्दुओंके मासिकपत्रोंमें मुसलमान और मुसलमानोंके मासिक पत्रोंमें हिन्दू लिखते हैं और एक दूसरेके

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