पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/५९

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गुप्त-निबन्धावली चरित-चर्चा फारसी कवितामें उनकी बनाई भक्तमाल मैंने पढ़ी है। आप स्वयं भी पहले उर्दकी कविता करते थे और कितनेही कवि, संशोधनके लिये अपनी कविता आपके पास भेजते थे । हिन्दीमें आपने कविता नहीं की, पर पुरानी कविताका उद्धार किया है। “महिला-मृदुवाणी” प्रका- शित कर आपने कविता करनेवाली स्त्रियोंकी जीवनी और उनकी कविताको रक्षित किया है। राजरमनामृत नामसे आपने कविता करनेवाले लोगोंकी कविता और जोवनीका एक अच्छा संग्रह किया है, जो अभी छपा नहीं है। इसी प्रकार हिन्दीके कवियोंकी एक रत्नमाला गूंथी है । स्वर्गीय 'अजान' कवि डुमरांव-निवासी पण्डित नकछेदी तिवा- रोने, जिनकी मृत्युका शोक अभी बहुत ताजा है (जो आश्विन सं० १६६२ में इम संमारको छोड़ गये हैं) कवि पद्माकरकी जीवनी लिग्वकर उसकी इतिहास संबंधी बातोंको एकबार जांच जानेके लिये आपके पास भेजी थी। इसी प्रकार और बहुतमी बातोंकी खोज तलाश आपके द्वारा होती है। आपके पुत्र मुंशी पीताम्बरप्रमाद, जिनकी उमर इस समय कोई ३० मालकी है ; उर्दू के बहुत अच्छे और होनहार कवि हैं। उनकी बनाई नीतिकी कई पुस्तक मैंने देवी हैं। साहित्य-संबंधमें राजस्थानको इम ममय दो उज्वल रत्न प्राप्त हैं, एक मुंशी देवीप्रसाद जोधपुर में और दूसरे पण्डित गौरीशंकरजी ओझा उदयपुरमें। पहलेने मुसलमानी ममयके भारत-इतिहासको खोजा है और दूसरेने संस्कृत और अंगरेजीक विद्वान होनेसे हिन्दुओंके प्राचीन इतिहासको । मब माहित्य-प्रमियोंकी इच्छा है, कि इन दो रनोंकी चमक दमक ग्खूब बढ़े और सबकी आशा है, कि भारतके विद्याभण्डारकी इनके. द्वारा बहुत कुछ पूर्ति हो। -सन् १९०० ई. [ ४२ ]