पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/६१२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है



देव-देवी स्तुति

आय मात आनन्दमयी आनन्द बढ़ायो। विश्व-विजयिनी विजय कीन्ह दुख दूर भगायो।। भइ काल-त्रियामा सेस अझ, सुखको सूरज परगट्यो। चहुं ओर देस उज्ज्वल भयो, दरकि हियो तमको फट्यो ।।

(७)

जय जय ध्वनि रहि पूरि बजत आनन्द बधाई। नभ ठहराय विमान देवगण देखें आई ।। सुग्वको भयो प्रभात उठौ सब भारतवासी । निरखहु नयन उघारि मात आई सुग्वरासी ।। सब पूजहु मात सनातनी, आदि सक्ति कहं धायक। रलमिल आनन्द उत्सव करहु, नाचौ दुख बिसरायक।।

(८)

झालर घण्टा ढोल ढाक दुन्दभी बजाओ। कोटि कोटि घण्टन-ध्वनिसों सब दिसा गुंजाओ ।। आनहु आनहु बिल्व-पत्र भागीरथिको जल । रक्त पीत अरु स्वेत नील आनहु कमलन दल ।। अञ्जली पूरिके मातके, चरनन महं अरपन करो। कहि अहो मात दुखहारिनी, दीन जननको दुख हरो।

[ ५९५ ]