पृष्ठ:गुप्त-निबन्धावली.djvu/७००

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हंसी-दिल्लगी मुगी हिन्द चर्बी हिन्द्र यवन मलेच्छ कसाई। हिन्दू सोडावाटर जिञ्जर हिन्दु बीयर हिसकी । सब कुछ हिन्दू सब कुछ हिन्दृ बात कहूं किस किसकी ? लण्डन हिन्दु पैरिस हिन्दू हिन्द गोल मिठाई । मूवी मछली बिलकुल हिन्दू जो यूरोपसे आई। तागड़ दिन्ना नागर बेल, तीन तूंबड़ी नीला कपड़ा : पूछ सहित जो मछली खाय, रेल पेल बैकुण्ठहि जाय। इकादशीको काटै चोटी, उसकी धाक स्वर्गमें मोटी !! जो बोतलका चाटे काग, उसके खुलं स्वर्गमें भाग। खड़ा खड़ा जो मारे धार, सोही करे देश उद्धार । यह देखो कलियुगके खेल, तागड़ दिन्ना नागर बेल । यह देखो कलियुगकी होली ; नीचे बाम्हन ऊपर कोली। नहिं कोई रानी नहिं कोई राजा ; पेलो डण्ड बजाओ बाजा ! -हिन्दी बंगवासी, २२ मार्च १८९७ 'जोगीड़ा। बाबाजी वचनम अङ्कड़ तोडूं कक्कड़ तोड़ तोड़ कश्चा सूत । बालू पेलू तेल निकालं तो जोगीका पूत । रेतमें नाव चलाऊं, नदीमें आग लगाऊं। हवामें भवन बनाऊं, तवे पे पेड़ लगाऊं । जाऊं उत्तर चीनमें तो मैं ऐसी बूटो लाऊं। जिसको वह बूटी छू जावे भेड़ा उसे बनाऊ ।। लगे कञ्चनकी ढेरी, सुखी हो जोगिन मेरी । बने चरननकी चेरी, लगे गहरी चौफेरी । [ ६८३ ]