पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१२५

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दृश्य २] चांदी की डिबिया मेरा ऐसा जी चाहता है, कि उसका कान पकड़ कर हिलाऊं। जेक che मार्लो बहुत भलामानुस । यह कोई अच्छी बात नहीं है, कि हमारी बातें हर एक आदमी जान ले । बार्थिविक इसकी तो चरचा न करना ही अच्छा है मिसेज़ बार्थिविक सब नीच जाता का यही हाल है, तुम यह नहीं बतला सकते कि वह कब सच बोल रहे हैं। आज जब मैं होलीरूड के घर से चलने के बाद बाजार गई, तो इन बेकार आदमियों में से एक श्राकर मुझसे बात करने लगा । मैं समझती हूँ मुझमें और गाड़ी में केवल बीस गज़ का अंतर था । लेकिन ऐसा मालूम हुआ कि वह सड़क फाड़कर निकल आया ।