पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१४२

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चाँदी की डिबिया
[ अड़्क २
 

बार्थिविक

[ उसे इशारा करने की चेष्टा करके ]

मैं यह नहीं कहता कि उसने अपराध नहीं किया। मैं इसके सब पहलुओं पर सोच रहा हूँ।

मिसेज़ बार्थिविक

यह सब फजूल, हर काम का वक्त होता है।

स्नो

[ छकु बनावटी आवाज़ में ]

मैं यह बता देना चाहता हूँ जनाब, कि चोरी का इलज़ाम उठा लेने से कोई फ़ायदा न होगा, क्योंकि हमले के मुक़दमें में सभी बातें खुल ही जायँगी।

[ जैक की ओर मार्मिक दृष्टि से देखता है ]

और जैक, मैं पहले अर्ज़ कर चुका हूं, वह मुक़दमा ज़रूर चलाया जायगा।

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