पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१६०

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चांदी की डिक्यिा { कुछ हिचिक कर) यानी-मैं- वार्थिविक कि सोफा पर ! क्या तुम्हारा मतलब यह चारपाई पर गए ही नहीं । जैक मुंह लटका कर ) नाहीं। बार्थिविक अगर तुम्हें कुछ भी याद नहीं है तो यह इतना कैसे याद रहा ? जैव क्यों कि आज सुबह मेरी आँख खुली तो मैंने अपने को वहीं पाया। मिसेज़ बाथिविक १५२