पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१५९

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चांदी की डिबिया बार्थिविक या ईश्वर ! अभी और आगे न जाने क्या क्या होमा ? मिसेज़ बार्थिविक मुझे विश्वास है कि तुम उसे घर में नहीं लाए, थे । जैक । यह सरासर झूठी बात है मैं जानती है इसमें सचाई की गंध तक नहीं है, मिस्टर रोपर। रोपर ( यकायक) तुम रात कहां सोए थे ? जैक (तुरन्त) सोफा पर-वहां- 41