पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१६८

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मोदी को डिबिया [अळू२ रुपए न दिए होते, तो उसने जरूर दावा किया होता। रोपर अब आपको मालूम हुआ कि धन कितना उपयोगी है । वार्थिविक मुझे अब भी सन्देह है कि हमें सच को छिपा देना चाहिए या नहीं। रोपर चालान होगा। बार्थिविक मा? आपका मनशा है कि इन्हें अदालत में जाना पड़ेगा? रोपर हाँ? १६०