पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१७०

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चाँदी की डिबिया
[ अड़्क २
 

मिसेज़ बार्थिविक

मार्के की बात नहीं।

रोपर

निजी बात है। शायद मैजिस्ट्रेट पर भी यही बीत चुकी हो।

बार्थिविक

[ पहलू बदल कर, मानो बोझ खिसका रहा है ]

तो अब आप इस मामले को अपने हाथ में रखेंगे?

रोपर

अगर ईश्वर की कृपा हुई!

[ हाथ बढ़ाता है ]

बार्थिविक

[ विरक्त भाव से हाथ हिलाकर ]

ईश्वर की इच्छा? क्या? आप चले?

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