पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१७१

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दृश्य २] चांदी की डिबिया रापर । जी हाँ ! ऐसा ही मेरे पास एक दूसरा मुकदमा भी है। [मिसेज़ बाणिविक का झुककर सलाम करता है और चला जाता है। बार्थिविक उसके पीछे-पीछे अन्त तक बातें करता जाता है। मिसेज़ बार्थिविक मेज़ पर बैठी हुई सिम्मक-सिसक कर रोने लगती है; बार्थिविक लौटता है। बार्थिविक आप ही श्राप बदनामी होगी। मिसेज़ बार्थिविक [ तुरत अपने रंज को छिपाकर मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि रोपर ने ऐसी बात को हँसी में क्यों उड़ा दिया ? बार्थिविक [विचित्रभाव से ताक कर तुम-तुम्हारी समझ में कोई बात नहीं पाती। तुम्हें रत्ती भर भी समझ नहीं है। १६३