पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/१८०

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चाँदो की डिबिया लिस मेरे कोई घर नहीं है। मेरे खाने का तो ठिकाना नहीं है। मैं बिलकुल बेकार हूं और न मेरे पास कुछ है जिससे इनका पालन कर सकूँ। मैजिस्ट्रेट यह कैसे? लिस [ शर्मा कर] मेरी बीबी निकल गई और सारी चीज़ गिरों रखदी। मैजिस्ट्रेट लेकिन तुमने उसे ऐसा करने क्यों दिया? लिवेंस मैं उसे रोक नहीं सका । उधर में काम की तलाश में गया, इधर यह निकल भागी। १७२