पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/२७

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दृश्य २ ]
चाँदी की डिबिया
 

मिसेज़ जोन्स

काम की खोज में दिन भर दौड़ते-दौड़ते बहुत थक जाते हैं। और कहीं कोई दूसरा रोज़गार भी नहीं मिलता, इसलिए अगर एक घूँट भी पी लेते हैं, तो सीधे दिमाग़ पर चढ़ जाती है। लेकिन जिस तरह वह मेरे साथ पेश आते हैं, उस तरह अपनी बीबी के साथ न पेश आना चाहिए। कभी-कभी तो वह मुझे घर से निकाल देते हैं। और मैं सारी रात मारी-मारी फिरती हूँ। वह मुझे घर में घुसने भी नहीं देते। पीछे से पछताते हैं। और वह मेरे पीछे-पीछे

लगे रहते हैं, गलियों में मुझ पर ताक लगाए रहते हैं, उन्हें ऐसा न चाहिए, क्योंकि मैंने कभी उनके साथ दगा नहीं की। और मैं उन से कहती हूँ, कि मिसेज़ बार्थिविक को तुम्हारा आना अच्छा नहीं लगता। लेकिन इस पर उन्हें क्रोध आ जाता है, और वह अमीरों को गालियाँ देने लगते हैं। उनकी नौकरी भी इसी

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