पृष्ठ:चाँदी की डिबिया.djvu/४६

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चाँदी की डिबिया
[ अङ्क१
 

बार्थिविक

भारत! इतने सवेरे! कैसी औरत है?

मारलो

[ स्वर से बिना कोई भाव प्रकट किए हुए ]

कह नहीं सकता हज़ूर। कोई खास बात नहीं। मुमकिन है कुछ मांगने आई हो। मेरा ख़याल है कोई ख़ैरात मांगनेवाली है।

बार्थिविक

क्या उन औरतों के से कपड़े पहने है?

मारलो

जी नहीं, मामूली कपड़े पहने है।

बार्थिविक

कुछ मांगना चाहती है?

३८