पृष्ठ:जनमेजय का नागयज्ञ.djvu/७

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शासन से हुई थी। सदैव से लड़ने वाली इन दो जातियो में मेल मिलाप हुआ, जिससे हजारों वर्षों तक आर्य साम्राज्य मे भारतीय प्रजा फूलती फलती रही। बस इन्ही घटनाओं के आधार पर इस नाटक की रचना हुई है।

इस नाटक के पात्रों में कल्पित केवल चार पाँच हैं। पुरुषो मे माणावक और त्रिविक्रम तथा स्त्रियो में दामिनी और शीला आदि। जहाँ तक हो सका है, इसके आख्यान भाग मे भारत काल को ऐतिहासिकता की रक्षा को गई है, और इन कल्पित चार पात्रो से मूल घटनाओं का सम्बन्ध-सूत्र जोड़ने का ही काम लिया गया है। इनमे से वास्तव मे दो एक का तो केवल नाम ही कल्पित है; जैसे वेद को पत्नी दामिनी। उनके चरित्र और व्यक्तित्व का भारत-इतिहास में बहुत कुछ अस्तित्व है।

कुकुरी सरमा भी जनमेजय को प्रधान शत्रु थी, जिसके पुत्र को जनमेजय के भाइयों ने पीटा था। महाभारत और पुराणो के देखने से विदित होता है कि यादवों को कुकुर नाम की एक शाखा थी। सम्भवतः सरमा उन्हीं यादवियों मे से थी जो दस्युओं द्वारा अर्जुन के सामने हरण की गई थी। तात्पर्य्य यह कि इस नाटक में ऐसी कोई घटना समाविष्ट नहीं है जिसका मूल भारत और हरिवंश में न हो। घटनाओ की परम्परा ठीक करने मे नाटकीय स्वतंत्रता से अवश्य कुछ काम लेना पड़ा है; परन्तु उतनी से अधिक नहीं, जितनी किसी ऐतिहासिक नाटक लिखने में ली जा सकती है।

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