पृष्ठ:जमसेदजी नसरवानजी ताता का जीवन चरित्र.djvu/५७

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जमसेदजी नसरवानजी ताता-


एक ग्रैजुयेट तहसीलदारने सर नारायण चंदावरकरको लिखा था कि वह अपने जीवनकी कमाई १० हजार रुपये इन्स्टीट्यूट को दान करके नौकरी छोड़कर वहाँ शिक्षा ग्रहण करैगा!

इससे आप देख सकते हैं कि रिसर्च इन्स्टीट्यूटका लोगों पर कितना प्रभाव पड़ा है।

ताता महोदयके बनवाये हुए आदर्श मकानोंके देखनेसे कितनी सकाई टपकती है और उनसे कितनी शिक्षा मिलती है।

सच बात तो यह है कि इस महात्माके प्रत्येक काम, उसकी बातचीत, उसका साथ, सब हमलोगों को उच्च जीवनकी शिक्षा देते थे। सबसे बड़ा काम जो आपने किया वह यह है कि हममें आत्मविश्वासका भाव जागृत कर दिया। हमको प्रेमपूर्ण सच्चा जीवन सिखला दिया।

सभापति लाई लैमिंगटन महोदयने ताताजीके गुणोंका वर्णन करते हुए महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। आपने कहा कि ताज़ा स्मारक सभा में प्रत्येक जाति और धर्म के सज्जन हैं यह बड़े हर्षकी बात है। आपने कहा कि किसी बड़े आदमीके मर जानेपर थोड़े दिनोंतक लोगोंका अफसोस ताजा रहता है। उस समय सभा होनेसे लोग बहुत बड़ी संख्यामें उपस्थित होजाते हैं। लेकिन ऐसे वक्त, जोशके मौके पर लोगों के विचारों का मूल्य बहुत थोड़ा है।

खूबीकी बात यह है कि ताता स्मारक सभा इतने दिनोंके बाद की गई तब भी उपस्थित सज्जनोंकी संख्या इतनी अधिक