पृष्ठ:जायसी ग्रंथावली.djvu/१८२

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( १६२ ) हिंदी में चरित्नकाव्य बहुत थोड़े हैं । ब्रजभाषा में तो कोई ऐसा चरितकाव्य वहीं जिसने जनता के बीच प्रसिद्धि प्राप्त की हो। पुरानी हिदी के पृथ्वीराज रासो, बीसलदेवरासो, हम्मीररासो आादि वीरगाथाों के पीछे चरितकाव्य की परंपरा हमें अवधी भाषा में ही मिलती है । ब्रजभाषा में केवल ब्रजवासीदास के ब्रजविलास का कुछ प्रचार कृष्णभक्तों में हुथा, शेष रामरसायन नादि जो दो एक प्रबंधकाव्य लिखे गए वे जनता को कुछ भी ग्राकाषत न कर सके । केशव की रामचंद्रिका का काव्यप्रेमियों में आादर रहा पर उसमें प्रबंधकाव्य के वे गुण नहीं हैं। जो होने चाहिए। चरितकाव्य में अवधी भाषा को ही सफलता हुई औौर अवधी भाषा के सर्वश्रेष्ठ रत्न हैं ‘रामचरितमानसऔर पद्मावत' । इस दष्टि से हिंदी साहित्य में हम जायसी के उच्च स्थान का अनुमान कर सकते हैं । बिना किसी निर्दिष्ट विवेचनपद्धति के यों ही कवियों की श्रेणी बाँधना औौर एक कवि को दूसरे कवि से छोटा या बड़ा कहना हम एक बहुत भोंड़ी बात समझते हैं । जायसी के स्थान का निश्चय करने के लिये हमें चाहिए कि हम पहले अलग अलग क्षेत्र निश्चित कर लें । सुबीते के लिये यहाँ हम हिंदी काव्य के दो ही क्षेत्र विभाग करके चलते हैं प्रबंध क्षेत्न औौर मुक्तक क्षेत्र । इन दोनों क्षेत्रों के भीतर भी कई उपविभाग हो सकते हैं । यहाँ मुक्तकें क्षेत्र से कोई प्रयोजन नहीं जिसके अंतर्गत केशवबिहारीभूषणदेव, पद्माकर आादि कवि ाते हैं । प्रबंध क्षेत्र के भीतर हम कह चुके हैं, दो काव्य सर्वश्रेष्ठ हैं-'रामचरितमानस' श्रेौर पद्मावत' । दोनों में ‘रामचरितमानसका पद ना है यह हम स्थान स्थान पर दिखाते भी ग्राए हैं और सबको स्वीकृत भी होगा । अतः समग्र प्रबंधक्षेत्र के विचार से हम कह सकते हैं कि प्रबंधक्षेत्र में जायसी का स्थान तुलसी से दूसरा है । यदि हम प्रबंधक्षेत्र के भीतर और तीन विभाग करते वीरगाथा, प्रेमगाथा औौर जीवनगाथा और इस व्यवस्था के प्रसार रासो आादि को वीरगाथा के अंतर्गतनगावती, पद्मा वती आादि को प्रेमगाथा के अंतर्गत तथा रामचरितमानस को जीवनगाथा के अतर्गत रखते हैं तो प्रेमगाथा की परंपरा के भीतर जिसमें कुतवनउसमान, नूर मुहम्मद आदि हैं) जायसी का नबर सबसे ऊँचा हरता है । मृगावतो, इंद्रावती, चित्नावली को बहुत जानते हैंपर पमावतसाहित्य का एक नादि कम लोग , ' हिंदी जगमगाता रत्न है। । यदि कोई इसके का आग्रह प्रबंध मुक्तक इन दो विचार करे कि और क्षेत्रों में कौन क्षेत्र अधिक महत्व का है, किस क्षेत्र में कवि की सहृदयता और भावुकात की पूरी परख हो सकती है, तो हम बार बार वही बात कहेंगे जो गोस्वामीजी की पालोचना में कह झाए हैं अर्थात् प्रबंध के भीतर थाई हुई मानव जीवन की भिन्न भिन्न दशाों के साथ जो अपने हृदय का पूर्ण सायंजस्य दिखा सके वही पूरा गौर सच्चा कवि । है । प्रबंधक्षेत्र में तुलसीदास जी का जो स्वच्च आासन है, उसका कारण यह है कि बीरता, प्रेम आदि जीवन का कोई एक ही पक्ष न लेकर उन्होंने संपूर्ण जीवन को लिया है और उसके भीतर जानेवाली अनेक दशाों के प्रति अपनी गहरी अनुभूति का परिचय दिया है । जायसी का क्षेत्र तुलसी की अपेक्षा परिमित है पर प्रेमवेदना उनकी अत्यंत गूढ़ है । रामचंद्र शुक्ल