पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/११

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तिलिस्माती मुँदरी


रानी का छोटा बच्चा पालने में लेटा हुआ था और अंगीठी में से जो कि वहां जल रही थी एक जलती लकड़ी लेकर उस कमरे की खिड़की के परदे में आग लगा दी, और "आग लगी, आग लगी; पालने वाले घर में आग लग गई,” यों पुकारता हुआ राजा की लड़की के कमरे तक जा पहुंचा और महल के सब नौकर "आग, आग" चिल्लाने लगे। यह सब होने में इतनी थोड़ी देर लगी कि रानी राजा की लड़की का गला घोटने न पाई और उसे वहीं ज़मीन पर पड़ी हुई छोड़ अपने बच्चे को बचाने के लिये दौड़ी।

राजा की लड़की किसी तरह मुशकिल से ज़मीन से उठी और तोते के कहने पर कि इस मौके पर ज़रूर भाग चलना चाहिये उसके साथ दरवाजे की राह जो कि अब खुला हुआ था, बाहर निकल गई और सीढ़ियां उतर कर बाग़ में दाख़िल हुई, जहां दोनों कौए भी मिल गये। तोता आगे हुआ और कौए पीछे और वह सब दीवार के एक छोटे दरवाजे पर पहुंचे। लड़की ने कुछ मुशकिल के साथ किवाड़ों की कुन्दी खोल ली और जब सब बाहर हुए अपने तई ऐन झील के किनारे पर पाया। उस वक्त झील के दूसरे किनारे के पास दो हंस तैर रहे थे; तोते ने राजा की लड़की से कहा कि “इन को अंगूठी दिखा कर हुक्म दे कि तुझे झील के पार पहुंचा दें"। ज्यों ही लड़की ने हंसों को अंगूठी दिखाई वह उसके पास आकर सिर झुका कर पूछने लगे-"क्या हुक्म है?" वह बोली-"मुझे झील के उस पार ले चलो"-हंसे ने उसी दम अपनी जोड़ी बना ली और राजा की लड़की ने पानी में धस अपने दोनों बाजुओं को दोनों हंसों की पीठ पर लगा लिया। धड़ उसका कंधों के नीचे तक पानी में हो गया, सिर्फ़ सिर ऊपर रहा और दोनों हंस उसे ले चले। तोता बड़े आराम से