पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/१४

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तिलिस्माती मुँदरी


बिस्तर के लिये नर्म २ पत्ते चुन कर ले आई और राजा की लड़की ने भी इस काम में मशक्कत की और रात होने के पहले ही एक उमदा पलंग एक छप्परनुमा चट्टान के नीचे तैयार हो गया, जहां ओस और सर्दी से बचकर वह रात भर खूब आराम से सोई। तीनों पखेरू पास के एक पेड़ पर बसे, और बारी २ से रात भर पहरा देते रहे।

सुबह को उन सभों ने वहां अंजीरों और अंगूरों का कलेवा करके मामूली तौर से कूच फिर शुरू कर दिया। अब दोपहर के क़रीब जब कि वह कुछ देर तक चल चुके थे, आगे वाले कौए को एक आदमी उनकी तरफ़ आता नज़र आया, और कौआ राजा की लड़की को आगाह करने के लिये फ़ौरन चिल्लाने लगा। लड़की ने कौए की आवाज़ को सुना, पर उसका मतलब न समझा। लेकिन जब उसको अपनी तरफ़ ज़ोर से कांव कांव करते हुए आता देखा, लड़की ने जाना कि कुछ अंदेशा है और भट एक झाड़ी के पीछे छिप गई। आदमी के चले जाने पर वह फिर चिड़ियों से मिल गई, लेकिन उनके कहने का एक लफ्ज़ भी नहीं समझ सकती थी। आख़िर को उसे मालूम हुआ कि जादू की अंगूठी उसके पास नहीं है। अंगूठी उसकी पतली उंगली के लिये बहुत बड़ी होने से सुबह के चलने में कहीं रास्ते में बेमालूम गिर गई थी। उसने हाथ उठा कर तोते को जताया कि मुंँदरी नहीं है, इस बात से उन सब को बहुत अफ़सोस हुआ, और लड़की के रोने, तोते के चीखने और कौओं की कांव कांव से एक ग़मगीन राग उस जंगली जगह में सुनाई देने लगा। आख़िरश तोते ने राजा को लड़की को अपने पीछे २ आने का इशारा किया और तमाम काफ़िला वहां से लौट चला। रास्ते में बड़ी होशियारी से खोई हुई अंगूठी ढूंढ़ते