पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/२८

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तिलिस्माती मुँदरी


के लिये किसी को पुकारेगी तो मार डाली जोयगी। जब वह बुढ़िया लड़की से यों कह चुकी कंजरों ने अपने देरे उखाड़ डाले और गधों पर सब असबाब लाद कर फ़ौरन वहां से चल दिये। राजा की लड़की को उन्होंने एक गधे की पीठ पर कि जिस पर उनका बिस्तर लदा हुआ था बैठा दिया। उस पर वह बड़े आराम से बैंठी चली गई, पर बहुत डरी हुई और रंजीदा थी।

वह चारों ओर निगाह करती जाती थी कि उसके कौए कहीं दिखाई दे पर वे कहीं नज़र नहीं आये। उसे यह भी डर था कि कंजर कहीं उसकी अंगूठी न चुरा लें, इस लिए उसने मौका पाकर उसे अपने सिर के बालों की तह में छिपा लिया। वह लोग सूरज छिपने के कुछ देर बाद तक चलते रहे और फिर एक अलहदा जंगल में ठहर गये, जहां कि उन्होंने आग जलाई और देरे गाड़ दिये। वहां उन्होंने खूब अच्छी तरह ब्यालू की और राजा की लड़की ने भी की और फिर वह एक तम्बू में सो रही।

राजा की लड़की बड़े सवेरे ही जाग गई और जब देखा कि कंजरी और उसके बालक जो उसके देरे में सोये थे अभी नहीं उठे हैं और देरे का दरवाज़ा भी खुला है तो आहिस्ता पैर रखती हुई बाहर निकल आई और चाहा को भाग जाऊं पर एक बड़े कुत्ते के गुर्राने की आवाज़ ने जो कि देरे के दरवाजे से कुछ दूर पर बैठा हुआ था उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। उसने देखा कि अगर मैं भागने की कोशिश करूँगी तो कुत्ता मेरी तरफ़ ज़रूर दौड़ेगा या भूकं कर सब कंजरों को जगा देगा, इस लिए वह चुपकी उसी जगह खड़ी रही और कुत्ता भी चुपका बैठा रहा, सिर्फ़ उस पर अपनी