पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/३१

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तिलिस्माती मुँदरी


चिड़ियां मिलीं उनसे पूछते हुए कि कहीं राजा की लड़की को तो नहीं देखा बग़ैर बहुत दिक्कत के उसके पास आ पहुंचे। और कहा कि जब हम चलने लगे बुड्ढा माहीगीर समझ गया कि लड़की की तलाश में जाते हैं और बालों की लट जो तूने भेजी थी उसने ले ली और उससे समझा कि तू जीती है और हिफ़ाज़त से है।

जब वह इस तरह प्यार के साथ अपनी चिड़ियों से बातें। कर रही थी, उसने देखा कि कंजरों के दो बालक जो कि उससे उम्र में कुछ बड़े थे और चुपके से उसके पीछे पीछे पाकर झाड़ियों की आड़ में छिप रहे थे यकायक झपट कर निकल आये और उन्होंने झट तोते को पकड़ लिया और उसे लेकर अपने देरों की तरफ़ दौड़ चले और चिल्लाते जांय कि एक तोता पकड़ा है। राजा की लड़की उनके पीछे पीछे रोती हुई और तोते को मांगती हुई दौड़ी पर उन्होंने कुछ ध्यान न दिया। लेकिन जैसे ही वह देरों के पास पहुंचे और कंजर लोग देखने को दौड़े कि क्या बात है तोते ने उनकी उंगलियों को अपनी चोंच से काटना शुरू किया, यहां तक कि उन्हों ने उसे छोड़ दिया और वह उड़ कर एक पेड़ पर जहां कि वह पहुंच न सकें जा बैठा। कंजरी ने पूछा क्या है? राजा की लड़की ने कहा कि "वह तोता मेरा है और मेरा पता लगाता हुआ मेरे पास आया है-इन लड़कों ने वह मुझसे छीन लिया है," और इतना कह कर खूब रोने लगी-और कहा कि “सिर्फ़ यह तोता ही मेरा दुनियां में एक दोस्त है" और मिन्नत की कि वह उसे मिल जाय। इस पर बढ़िया बोली-"अच्छा, अगर तू अच्छी तरह रहेगी और रंज न करेगी कि जिस्से उमदा और मोटी ताज़ी मालूम पड़े जब कि हम तुझे लाहौर में बेचने के लिये ले जायं तो तेरा तोता तुझको मिल जायगा"-