पृष्ठ:तिलस्माती मुँदरी.djvu/३५

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तिलिस्माती मुँदरी


लगा लिया और मारे बोसों के हैरान कर दिया-वह दोनों तरबूज़ कंजरों के बालकों को बांट दिये गये, फिर राजा की लड़की ने उन सब को तरबूज़ों का रास्ता बता दिया और सभी ने खूब ही उन फलों की दावत उड़ाई, यहां तक कि उस जगह ज़मीन पर सब तरफ़ तरबूज़ों के टुकड़े पड़े नज़र आते थे। बेचारे कुत्ते बहुत प्यासे मरे थे, जब उनको तरबूज़ दिये गये और वह उनके पानी को जीभ से चाटने लगे तो एक अजब कैफ़ियत मालूम होती थी। देरा तरबूजों के पास ही डाला गया और दूसरे रोज़ सुबह को, बाद तरबूज़ों को दूसरी ज़ियाफ़त के, वहां से कूच हुआ और गधों पर जितने आ सके तरबूज़ लाद लिये गये, क्योंकि डर था कि शायद दूसरे पड़ाव का कुआ भी सूखा निकले, लेकिन वह सूखा न था। वह लोग बाकी रेगिस्तान को बग़ैर किसी मुसीबत के तै कर गये। अब वह कंजर राजा की लड़की पर दुचंद मिहर्ब्बन थे, क्योंकि उसने उनकी जान बचाई थी; और कंजरी ने उस से कहा कि “मैं तो तुझे छोड़ दूं लेकिन मेरा खाविंद मना करता है, मगर तू अंदेशा मत कर, मैं ऐसा करूंगी कि तू सिर्फ़ किसी नेक बीबी के हाथ बेची जायगी जो तेरी खूब परवरिश करेगी और तुझे खुश रक्खेगी"।

थोड़े दिनों बाद यह लोग लाहौर के क़रीब आन पहुंचे और उन्हें उस शहर की मीनारें और बुर्ज और आलीशान मकान दिखाई देने लगे। शहर के दरवाजे से कुछ हट कर दरखों के नीचे इन्होंने अपना डेरा किया। कंजरी ने एक सफ़ेद बुकनी अपने सन्दूक में से निकाल कर थोड़े पानी में मिला लड़की को उससे नहला दिया तो लड़की फिर वैसी ही गोरी हो गई जैसी कि बूटी का रंग लगने से पहले थी।