पृष्ठ:देव और बिहारी.djvu/२४८

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२५६ देव और विहारी प्रतिभा के अद्भुत खेल दिखलाए हैं । देवजी 'पैदायशी' ककि ___ क्या विहारीलाल के विषय में भी यही बात कही जा सकती है ? (६) शृंगार-कविता के अंतर्गत सानुराग प्रेम के वर्णन में देवजी का सामना हिंदी-भाषा का कोई भी कवि नहीं कर सकता। सारांश यह कि हमारी राय में शृंगारी कवियों में देवजी का स्थान पहले है और विहारीलाल का बाद को। जिन कारणों से हमने यह मत दृढ़ किया है, उनका उल्लेख पुस्तक में स्थल- स्थल पर है। आइए, पुस्तक समाप्त करने के पूर्व देवजी की कविता के ऊपर दिखलाए हुए गुण स्मरण रखने के लिये निम्न-लिखित छंद याद कर लीजिए- डारद्रुम-पालन, बिछौना नव पल्लव के, सुमन-भिंगूला सोहै तन-छबि भारी दै। पवन झुलावै, केकी-कीर बतरावै "देव', कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै। पूरित पराग सों उतारी करै राई-नोन कुंद-कली-नायिका लतान सिर सारी दै मदन-महीपजू को बालक बसंत, ताहि प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दें