पृष्ठ:देव और बिहारी.djvu/३०२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


३१० देव और विहारी हमारे हृदय में जगह कर गई है, और उसी ने विज्ञान में हमारी उन्नति का मार्ग रोक रक्खा है। परंतु पाश्चात्य विद्वान् ऐसा नहीं सोचते। उन्होंने अन्य विषयों की तरह पाक्षिशास्त्र ( Outhology ) का भी खूब अध्ययन किया है। अहाँ तक बन पड़ा, उन्होंने प्रत्येक देश में बसनेवाले प्रत्येक जाति के पक्षी का पूरा हाल जानने का प्रयत्न किया है । भारतीय पशु-पक्षियों के विषय में भी उन लोगों ने यथासाध्य अनुसंधान किया है, और हमारा इस विषय का सब ज्ञान उन्हीं के अनुसंधानों पर निर्भर है। उदाहरण के लिये चक्रवाक ही को ले लीजिए। अंगरेज़ी में चक्रवाक के Rnddy grose. kudly shelldsake, Brahmmy ducle इत्यादि कई नाम हैं। वैज्ञानिक भाषा में उसे AMAR Aaron अथवा Caxarea rntalia कहते हैं। पहले जब Linmens नामक प्राणिशास्त्रवत्ता ने पक्षियों का विभाग किया, तब उसे Anas-नामक जाति (genus) में रक्खा था, परंतु पीछे के वैज्ञानिकों ने Anas-जाति को कई खंडों में विभक कर डाला, और चक्रवाक को Casarca-शीर्षक जाति में रक्खा । तभी से इसका नाम भी Avah rasarea के स्थान पर (Pasarea rutalin हो गया । Anar casarca और Cararea rutaha चक्रवाक के ही नाम हैं। इसमें संदेह की जगह नहीं। पाठकों में से जो महाशय इस विषय की विशेष छानबीन करना चाहें, वे निम्नलिखित ग्रंथ देखें- (१) मॉनियर विलियम्स एम० ए०-कृत Sanskrit English Dictio

  • देखिए Penny Cyclopaedis

+ Chakraralka - As M. the rudly goose, Gimmonly called the Brahmay Duck. anay Chaura. [ Edition 1872, pp. 311]