पृष्ठ:निर्मला.djvu/१७३

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निर्मला
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चार सौ रुपये दे देगी,और क्या कर सकती है? वकील साहब का यह हाल हो रहा है,उसे भी तो अभी पहाड़ सी उम्र काटनी है। फिर कौन जाने उनके घर का क्या हाल है। इधर छःमहीने से बेचारे घर बैठे हैं। रुपये आकाश से थोड़े ही बरसते हैं।दस-,बीस हजार होंगे भी तो बैङ्क में होंगे,कुछ निर्मला के पास तो रक्खे न होंगे। हमारा २००) महीने का खर्च है,तो क्या उनका ४००) महीने का भी न होगा?

सुधा को तो नींद आ गई;पर डॉक्टर साहब बहुत देर तक करवटें बदलते रहे! फिर कुछ सोच कर उठे और मेज़ पर बैठ कर एक पत्र लिखने लगे!