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[ Part I Ch. 2
परमार्थसोपान
8. HAND OVER TO GOD, UNSULLIED, THIS FINE
VESTURE WHICH HE HAS SO SKILLFULLY
WOVEN.
झीनी झीनी बीनी चदरिया ॥ टे ॥
काहे कै ताना काहे कै भरनी,
कौन तार से बीनी चदरिया ॥ १ ॥
इडा पिंगला ताना भरनी,
सुखमन तार से बीनी चदरिया ॥ २ ॥
आठ कँवल दल चरखा डोलै,
पाँच तत्व गुन तीनी चदरिया ॥ ३ ॥
साँइ को सियत मास दस लागे,
ठोंक ठोंक कै बीनी चदरिया ॥४॥
सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी,
ओढ़ि के मैली कीनी चदरिया ॥ ५ ॥
दास कबीर जतन करि ओढ़ी,
ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया ॥ ६ ॥