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[ Part I Ch. 4
परमार्थसोपान
17. MIRA'S MIND ON THE RACK.
जोगी मत जा, मत जा, मत जा,
पाँइ परूँ मैं तेरी ॥ टे ॥
प्रेम भक्ति को पैण्ड़ो न्यारो,
हम को गैल लगा जा ॥१॥
अगर चन्दन की चिता रचाऊँ,
अपणे हाथ जला जा ॥२॥
जल बल भई भस्म की ढेरी,
अपणे अंग लगा जा ॥३॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
ज्योत में ज्योत मिला जा ॥ ४ ॥