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[ Part I Ch. 5
परमार्थसोपान
11. EKNATH ON THE VISION OF GOD IN ALL
STATES OF CONSCIOUSNESS.
गुरु कृपाञ्जन पायो रे भाई,
राम बिना कछु देखत नाहीं ॥ १ ॥
अन्दर राम बाहर राम,
जहँ देखे तहँ रामहि राम ॥ २ ॥
जागत राम सोबत राम,
सपन में देखूँ आतमराम ॥ ३ ॥
एका जनार्दनी अनुभव नीका,
जहँ देखे वहँ राम सरीका ॥ ४ ॥