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[ Part I Ch. 5
परमार्थसोपान


25. THE GRACE OF GOD IN THE SHAPE OF
ANAHAT SAVES KABIR FROM THE
REIGN OF UNIVERSAL DECEIPT.



रमैया कि दुलहिनि लूटल बजार ॥ टे ॥

सुरपुर लूट नागपुर लूटा,
तीन लोक मच हाहाकार ॥ १ ॥

ब्रह्मा लूट महादेव लूटा,
नारद मुनि के परी पिछार ॥ २ ॥

स्रिंगी की मिंगी करि डारी,
परासर के उदर बिदार ॥ ३ ॥

कनफूँका चिदकासी लूटे,
लूटे जोगेसर करत बिचार ॥ ४ ॥

हम तो बचिगे साहब दया से,
सब्द डोर गहि उतरे पार ॥ ५ ॥

कहत कबीर सुनो भई साधो,
इस ठगिनी से रहो हुसियार ॥ ६ ॥