पृष्ठ:परीक्षा गुरु.djvu/२००

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परिक्षागुरु
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"तो ख़ातरी कैसे हो? ऐसी अँधेरी कोठरी में कोन रहै? (बृन्द) जो पहले करिये जतन तो पीछे फल होय। आग लगे खोदे कुआ कैसे पावे तोय॥ इस काठ कबाड़ के तो समय पर रुपे मैं दो आने भी नहीं उठते" एक लेनदार ने कहा.

"ऐसे ही अनसमझ आदमी जल्दी करके बेसबब दूसरों का काम बिगाड़ दिया करते हैं" मास्टर शिंभूदयाल कहनें लगे.

इतने में हरकिशोर अदालत के एक चपरासी को लेकर मदनमोहन के मकान पर आ पहुंचे और चपरासी नें सम्मन पर मदनमोहन सै क़ायदे मूजिब इत्तला लिखा ली.

उस्को गए थोड़ी देर न बीतनें पाई थी कि आग़ा हसनजान के वकील की नोटिस आ पहुंची उस्मैं लिखा था कि "आग़ा हसनजान की तरफ़ सै मुझको आपके जतानें के लिये यह फर्मायश हुई है कि आप उस्के पहले की ख़रीद के घोड़ों की कीमत का रुपया तत्काल चुका दैं और कल की ख़रीद के तीन घोड़ों की कीमत चौबीस घन्टे के भीतर भेज कर अपने घोड़े मंगवालें जो इस मयाद के भीतर कुल रुपया न चुका दिया जायगा तो ये घोड़े नीलाम कर दिये जायँगे और इन्की क़ीमत में जो कमी रहैगी पहले की बाक़ी समेत नालिश करके आप सै वसूल की जायगी"

थोडी देर पीछे मिस्टर ब्राइट का सम्मन और कच्ची कुरकी एक साथ आ पहुंची इस्सै लोगों के घरबराहट की कुछ हद न रही घर मैं मामला होने की आशा जाती रही सबको अपनी अपनी रकम ग़लत मालूम होनें लगी और सब नालिश करनें के लिये कचहरी को दोड गए.