उगवना कराना । ३. पचे हुए माल को निकलवाना | उगवना* - क्रि० स० दे० "उगाना" । उगसाना - क्रि० स० दे० " उक- साना" । उगाना - क्रि० स० जमाना । अंकुरित करना । उगार, उगाल-संज्ञा पुं० पीक । थूक । खखार । उगालदान -संज्ञा पुं० थूकने या खखार आदि गिराने का बरतन । पीकदान । उगाहना- क्रि० स० वसूल करना । उगाही -संज्ञा स्त्री० १ रुपया-पैसा वसूल करने का काम । वसूली । २. वसूल किया हुआ रुपया-पैसा । उगिलना* +- क्रि० स० दे० "उग- लना" । उप्र - वि० प्रचंड । तेज़ | संज्ञा पुं० १. महादेव । २. वत्सनाग विष । उग्रता - संज्ञा स्त्री० तेज़ी । प्रचंडता । उघटना- क्रि० प्र० १. ताल देना । सम पर तान तोड़ना। २. दबी-दबाई बात को उभाड़ना । ३. कभी के किए अपने उपकार या दूसरे के हुए अपराध को बार बार कहकर ताना देना | उघटा - वि० किए हुए उपकार को बार बार कहनेवाला । जतानेवाला । एहसान संज्ञा पुं० उघटने का कार्य्यं । उघड़ना - क्रि० अ० १. श्रावरण का · हटना । २. भंडा फूटना । उघरना|–क्रि० प्र० दे० "उष- इना" । उघाड़ना- क्रि०स० १. आवरण का ६८ उच्चरमा हटाना । २. श्रावरण रहित करना । ३. नंगा करना । ४. गुप्त बात की खोलना । उघारना- क्रि० स० दे० " उघाड़ना" । उचकन -संज्ञा पुं० ईंट, पत्थर आदि का वह टुकड़ा जिसे नीचे देकर किसी चीज़ को एक ओर ऊँचा करते हैं । उचकना - क्रि० प्र० १. ऊँचा होने के लिये पैर के पंजों के बल एड़ी उठाकर खड़ा होना। २. उछलना । कूदना । क्रि० स० उछलकर लेना । लपककर छीनना । उचका - क्रि० वि० अचानक । सहसा । उचकाना - क्रि० स० उठाना । ऊपर करना । उचक्का - संज्ञा पुं० [स्त्री०] १. उचक कर चीज़ ले भागनेवाला श्रादमी । ठग । २. बदमाश । उचटना- क्रि० प्र० १. उचढ़ना । २. अलग होना । ३. भड़कना । ४. विरक्त होना । उच्चटाना - क्रि० स० १. उचाइना | २. अलग करना । ३. उदासीन करना । ४. भड़काना | उचड़ना- क्रि० अ० सटी या लगी हुई चीज़ का अलग हाना । उचना- क्रि० प्र० १. उचकना । २. उठना । क्रि० स० ऊँचा करना । उठाना । उच्चनि - संज्ञा स्त्री० उभाड़ । उच्चरंग | -संज्ञा पुं० पतिंगा उचरना- क्रि० स० उच्चारण करना । बोलना । क्रि० म० मुँह से शब्द निकलना । + क्रि० भ० दे० "उचढ़ना" ।
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