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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/१२८

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१२० पंच-व ऋ - एक स्वर जो वर्णमाला का सातवाँ इसका उच्चारण-स्थान वर्ण है । मूर्द्धा है । संज्ञा स्त्री० १. देवमाता । २. निंदा । ॠक-संज्ञा स्त्री० वेदमंत्र । संज्ञा पुं० दे० "ऋग्वेद" । ऋत-संज्ञा पुं० [स्त्री० ऋक्षी ] १. भालू । २. तारा । ऋक्षपति - संज्ञा पुं० चंद्रमा | ऋग्वेद - मंज्ञा पुं० चार वेदों में से एक । ॠग्वेदी- वि० ॠग्वेद का जानने या पढ़नवाला । ऋचा -संज्ञा स्त्रो० वेदमंत्र | ऋच्छ-संज्ञा पुं० दे० "ऋक्ष" । ऋजु - वि० १. सीधा । २. सरल । ऋजुता -संज्ञा स्त्री० १. सीधापन । २. सज्जनता । c ऋण-संज्ञा पुं० [वि० ऋणी ] कुज़ । उधार । ऋणी - वि० १. कुज़दार । २. अनु- गृहीत | ऋतु -संज्ञा स्त्री० १. प्राकृतिक अव स्था के अनुसार वर्ष के दो दो महीनों के विभाग जो छः हैं । २. रजोदर्शन के उपरांत वह काल जिसमें स्त्रियं गर्भ धारण के योग्य ऋ होती हैं। ऋतुचर्य्या- -संज्ञा खो० ऋतुओं के अनु- सार आहार- 'वहार की व्यवस्था । ऋतुमती - वि० स्त्री० मासिक धर्मयुक्ता । रजस्वला । ऋतुराज -संज्ञा पुं० वसंत ऋतु । ऋतुवती :- वि०खो० दे० "ऋतुमती" | ऋतुस्नान - संज्ञा पुं० [वि० [स्त्री० ऋतु- स्नाता ] रजोदर्शन के चौथे दिन का स्त्रियों का स्नान । ऋत्विज - संज्ञा पुं० [स्त्री० श्राविजी ] यज्ञ करनेवाला | ऋद्ध - वि० संपन्न । समृद्ध ऋद्धि-संज्ञा स्त्री० १. समृद्धि । २. छंद का एक भेद । ऋद्धि-सिद्धि - संज्ञा स्त्री० सफलता । समृद्धि और ऋनिया - वि० ऋणी । ऋभु-सञ्ज्ञा पुं० देवता । ऋषभ - संज्ञा पुं० १. बैल । २. संगीत के सात स्वरों में से दूसरा । ३. जैन- देवता | ऋषि-संज्ञा पुं० वेद मंत्रों का प्रकाश करनेवाला | साधु | ऋष्यमूक- संज्ञा पुं० दक्षिण का एक पर्वत । ए-संस्कृत वर्णमाला का ग्यारहवाँ और नागरी वर्णमाला का आठव स्वर वर्ण । यह अ और इ के योग ए से बना है; इसी लिये यह कंठ- तालव्य है । एच- पैच -संज्ञा पुं० १. उलझन ।