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आकर्षण शक्ति के पास उसकी शक्ति या प्रेरणा से लाया जाना । आकर्षण शक्ति-संज्ञा स्त्री० भौतिक पदार्थों की वह शक्ति जिससे वे अन्य पदार्थों की वह शक्ति जिससे वे अन्य पदार्थों को अपनी ओर खींचते हैं। श्राकर्षित - वि० खींचा हुआ । आकलन - संज्ञा पुं० [वि० आकलनीय, आकलित ] १. ग्रहण | ३. गिनती करना । आकली | - संज्ञा स्त्री० श्राकुलता । बे- चैनी । २. संग्रह । श्राकस्मिक - वि० जो बिना किसी कारण के हो । श्राकांक्षा-संज्ञा स्त्री० इच्छा । अभि- लाषा । श्राकांक्षित - वि० १. इच्छित । २. अपेक्षित । ७५ श्राकुलित आकाशदीया - संज्ञा पुं० वह दीपक जो कार्तिक में हिंदू लोग कंडील में रखकर एक ऊँचे बॉल के सिरे पर fast जलाते हैं । श्राकाशबेल - संज्ञा स्त्री० दे० "अमर- बेल" । आकाशभाषित-संज्ञा पुं० नाटक के अभिनय में वक्ता का ऊपर की ओर देखकर किसी प्रश्न को इस तरह कहना मानो वह उससे किया जा रहा है और फिर उसका उत्तर देना । श्राकाशमंडल - संज्ञा पुं० खगोल | श्राकाशलोचन - संज्ञा पुं० वह स्थान जहाँ से ग्रहों की स्थिति या गति देखी जाती है । मानमंदिर । अब- ज़रवेटरी । श्राकाशवाणी - संज्ञा स्त्री० [सं०] वह शब्द या वाक्य जो श्राकाश से देवता लोग बोलें । आकांक्षी - वि० [स्त्री० आकांक्षिणी ] श्राकाशवृत्ति-संज्ञा स्त्री० ऐसी श्रम- इच्छा करनेवाला | आकार-संज्ञा पुं० १. स्वरूप । २. 1 ३. बनावट । श्राकारी-वि० [ स्त्रो० भाकारिणी ] आह्वान करनेवाला । बुलानेवाला । श्राकाश-संज्ञा पुं० अंतरिक्ष । श्रास- मान । आकाशकुसुम -संज्ञा पुं० १. आकाश का फूल । २. अनहोनी बात | आकाशगंगा - संज्ञा श्री० बहुत से छोटे छोटे तारों का एक विस्तृत समूह जो आकाश में उत्तर-दक्षिण फैला है । आकाशवारी - वि० धाकाश में फिरने वाला । संज्ञा पुं० १. सूर्य्यादि ग्रह । नक्षत्र । २. वायु । ३. पक्षी । ४. देवता । दनी जो बँधी न हो । श्राकाशी - संज्ञा स्त्री० वह चाँदनी जो धूप आदि से बचने के लिये तानी जाती है । श्राकिल - वि० बुद्धिमान् । श्राकीर्ण - वि० व्याप्त । पूर्ण । श्राकुंचन - संज्ञा पुं० सिकुड़ना । श्राकुंठन - संज्ञा पुं० [वि० भाकुंठित ] १. गुठला या कुंद होना । २. लज्जा । श्राकुल- वि० [ संज्ञा आकुलता ] व्यग्र । घबराया हुआ । श्राकुलता - संज्ञा स्त्री० [वि० भाकुलित ] १. व्याकुलता । २. व्याप्ति । श्राकुलित - वि० १. व्याकुल । घब- राया हुआ । २. व्याप्त ।