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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/९७

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आस-पास आस-पास - क्रि० वि० चारों ओर । बिकट | इधर-उधर । श्रसमान-संज्ञा पुं० [वि० भासमानी] १. आकाश । २. स्वर्ग । आसमानी - वि० १. श्राकाश-संबंधी । २. प्रकाश के रंग का । हलका नीला । संज्ञा स्त्री० ताड़ी । श्रासमुद्र- क्रि० वि० समुद्र पर्यंत । श्रासरा - संज्ञा पुं० १. सहारा । अव- २. लंब । भरोसा 1 ३. शरण । पनाह । ४. प्रतीक्षा । श्रासा - संज्ञा स्त्री० दे० "आशा" । श्रासाइश - संज्ञा स्त्री० श्राराम । सुख । चैन । आसान - वि० सहज । श्रासानी -संज्ञा स्त्री० सरलता । सुबीता । श्रसार-संज्ञा पुं० चिह्न । लक्षण । आसावरी - संज्ञा स्त्री० श्री राग की एक रागिनी । संज्ञा पुं० एक प्रकार का कबूतर | श्रासिख -संज्ञा स्त्री० दे० " श्राशिष” । श्रसिन -संज्ञा पुं० दे० " आश्विन " | श्रासीन - वि० बैठा हुआ । विराजमान । आसीस +-संज्ञा स्त्री० दे० "आशिष" । आसु - क्रि० वि० दे० " श्राशु" । श्रासुर - वि० असुर-संबंधी । श्रासुरी - वि० असुर-संबंधी । राचसी । संज्ञा स्त्री० राचस की स्त्री । आसूदा - वि० १. संतुष्ट । २. संपन्न । आसेब - [ वि० आसेबी ] भूत प्रेत की बाधा । श्रासोज -संज्ञा पुं० आश्विन मास । कार का महीना । झालौ - क्रि० वि० इस 1 श्रास्तिक - वि० ईश्वर के अस्तित्व को ८६ आहार श्रास्तिकता -संज्ञा स्त्री० ईश्वर में विश्वास | आस्तीन - संज्ञा स्त्री० पहनने के कपड़े का वह भाग जो है । बाँही । बांह को ढंकता १. पूज्य बुद्धि । आस्था-संज्ञा स्त्री० श्रद्धा । २. सभा । बैठक । श्रास्पद-संज्ञा पुं० १. स्थान । २. कार्य्यं । ३. पद । प्रतिष्ठा । ४. वंश । जाति । श्रस्य - संज्ञा पुं० मुँह । आस्वाद-संज्ञा पुं० रस । स्वाद । आस्वादन -संज्ञा पुं० स्वाद लेना । श्राह - भव्य० पीड़ा, शोक, खेद और ग्लानि-सूचक अव्यय । संज्ञा स्त्री० दुःख या क्लेश-सूचक शब्द | ठंढी साँस । आहट - संज्ञा स्त्री० वह शब्द जो चलने में पैर तथा दूसरे अंगों से होता है । खटका । श्राहत - वि० घायल | जखमी | श्रहन - संज्ञा पुं० लोहा । श्राहर - संज्ञा पुं० समय । संज्ञा पुं० युद्ध | लड़ाई | श्राहरण - संज्ञा पुं० १. छीनना । हर लेना । २. किसी पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना । ३. ग्रहण । आहवन -संज्ञा यज्ञ करना । होम करना । श्री संज्ञा स्त्री० १. हाँक । दुहाई । घोषणा । २. पुकार । श्राहा-अव्य० श्रश्चय्यं और हर्ष-सूचक श्राहार-संज्ञा पुं० १. खाना । २. खाने की वस्तु ।