पृष्ठ:बुद्धदेव.djvu/१६६

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(२०) छठा चातुर्मास्य • राजगृह पहुँचकर वे वेणु वन में ठहरे। इस वष वे राजगृह के आसपास ही उपदेश करते रहे। इसी वर्षे उन्होंने महाराज विंवसार को पट्टमहिषी क्षमा को उपसंपदा ग्रहण कराई। यह क्षेमा शाकल्य- नगर के राजकुल में उत्पन्न हुई थी और बड़ी रूपवती थी। एक दिन वह अपने उद्यान में जो वेणुवन के पास था, विहार करने गई थी। वहाँ से लौटते समय वह वेणुवन में गई। वहाँ भगवान् बुद्धदेव के उपदेश सुनकर क्षेमा को विराग उत्पन्न हो गया और उसने महाराज विवसार की आज्ञा लेकर उपसंपदााग्रहण की। ___ उसी वर्ष अनेक स्त्रियों ने उपसंपदा ग्रहण की जिनमें महा- कश्यप को स्त्री भद्रकापिलानी, धर्मदीना, नंदमात, उत्तरा, उपनंदा और राहुल-माता यशोधरा मुख्याथीं। ___ उसी वर्ष भगवान् ने आनंद के योग-विभूति प्रदर्शन पर सदा के लिये भिक्षुसंघ को योग को विभूतियाँ दिखलाने से वारित किया। इसके बाद तीर्थंकरों ने जब यह सुना कि बुद्धदेव ने अपने संघ को विभूति-प्रदर्शन करने से मना किया है, तब उन लोगों ने वार बार भगवान बुद्धदेव को योग-विभूति दिखलाने के लिये आह्वान किया। जव महात्मा बुद्धदेव ने उनके आह्वान को अस्वीकार किया तब, वे लोग अनेक प्रकार की निंदा और परीवाद करने लगे। उसवर्षभगवान् ने राजगृह के पास मुकुल नामक पर्वत पर अपना छठा चातुर्मास्य बिताया और फिर वेराजगृह के वेणुवन में आ विराजे।