पृष्ठ:बुद्धदेव.djvu/२४४

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( २३१ ) एवं वासेट जानाहि कस्सको सो न ब्राह्मणो। योहि कोचि मनुस्सेसुप्रथु सिप्पेन जीवति एवं वासेट जानाहि सिप्पिको सो न ब्राह्मणो। योहि कोचि मनुस्सेसु वोहार उपजीवति एवं वासेट्ठ जानाहि वाणिजो सो न ब्राह्मणो। यो कोचि मनुस्सेसु परपेस्सेन जीवति एवं वासेट जानाहि पेस्सिको सो न ब्राह्मणो। योहि कोचि मनुस्सेसु अदिन्नं उपजीवति एवं वासेट्ठ जानाहि चोरो एसो न ब्राह्मणो । योहि कोचि मनुस्सेसु इस्सुत्यं उपजीवति एवं वासेट जानाहि योधाजीवी न ब्राह्मणो । योहि कोचि मनुस्सेसु पोरोहिच्चेन जीवति एवं वासेट्ठ जानाहि याजको सो न ब्राह्मणे । योहि कोचि मनुस्सेसु गामं रटुं च जीवति एवं वासेट्ठ जानाहि राजा एसो न ब्राह्मणो । न वाहं ब्राह्मणं अमि योनिजं मत्तिसंभवं : भोवादि नाम सो होति स वे होति सकिंचनो आकिचनं अनादानं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणे। हे वाशेष्ठ ! जो पुरुष गोरक्षा से जीवन निर्वाह करता है वह कृषक है, ब्राह्मण नहीं है। इसी प्रकार शिल्प का काम करनेवाला शिल्पी, व्यवहार या लेन करनेवाला वणिक वा वैश्य, चोरी करने- वाला चोर, शस्त्रोपजीवी योद्धा, पुरोहिती करनेवाला याजक और