पृष्ठ:मानसरोवर भाग 3.djvu/१४६

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धिकार १४५ आखिर शरीर में गरमो लाने के लिए उसे एक हिकमत सूम्सी । वह मदिर में इधर-उधर दौड़ने लगा , लेकिन विलासी जीव था, सारा देर में हॉफर गिर पड़ा। प्रातःकाल लोगों ने किवाड़ खोले तो पासोनियस को भूमि पर पढ़े देखा। मालूम होता था, उसका शरीर अकड़ गया है । बहुत चीखने-चिल्लाने पर उसने आँखें खोलो, पर जगह से हिल न सका । कितनी दयनीय दशा थी, किन्तु किसी को उस पर दया न आई । "यूनान में देश-द्रोह सबसे बड़ा अपराध था और द्रोही के लिए कहीं क्षमा न थी, कहीं दया न थी। ए-अभी मरा नहीं है। दसरा-द्रोहियों को मौत नही आती तीसरा-पड़ा रहने दो, मर जायगा। चौथा-मक किये हुए है! पांचवा-अपने किले की सजा पा चुका, अब छोड़ देना चाहिए । सहसा पासोनियस उठ बैठा और उद्दण्ड भाव से बोला-कौन कहता है कि इसे ' छोड़ देना चाहिए ! नहीं, मुझे मत छोड़ना, वरना पछताओगे। मैं स्वार्थी हूँ, विषय- भोगी हूँ, सुम्स पर भूलकर भी विश्वास मत करना । आह ! मेरे कारण तुम लोगों को क्या-क्या झेलना पड़ा, इसे सोचकर मेरा जो चाहता है कि अपनी इन्द्रियों को जलाकर भस्म कर दूं। मैं अगर पौ बार जन्म लेकर इस पाप प्रायश्चित्त करूँ, तो मेरा उद्धार न होगा। तुम भूलकर भी मेरा विश्वास न करो। मुझे स्वयं अपने ऊपर विश्वास नहीं । विलास के प्रेमी सत्य का पालन नहीं कर सकते। मैं अब भी आपको कुछ सेवा कर सकता हूँ, मुझे ऐसे-ऐसे गुप्त रहस्य मालूम हैं, जिन्हें जानकर आप ईरानियों का संहार कर सकते हैं, लेकिन मुझे अपने ऊपर विश्वास नहीं है और आपसे भी यही कहता हूँ कि मुझ पर विश्वास न कीजिए। आज रात को देवी को मैंने सच्चे दिल से बन्दना को है और उन्होंने मुझे ऐसे यन्त्र बताये हैं, जिनते हम शत्रुओं को परास्त कर सकते हैं, ईरानियों के बढ़ते हुए दल को आज भी आन-को-आन में उड़ा सकते हैं। लेकिन मुझे अपने ऊपर विश्वास नहीं है, मैं यहाँ से बाहर निकलकर इन बातों को भूल जाऊँगा। बहुत सशय है कि फिर ईरानियों को गुप्त सहायता करने लगू, इसलिए मुम्स पर विश्वास न कीजिए। १०