पृष्ठ:मानसरोवर भाग 3.djvu/१७

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मानसरोवर - आपकी कुछ सेवा कर सकूँ तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। मित्र जोशी । हम सब मिट्टी के पुतले है, कोई निर्दोष नहीं । मनुष्य बिगड़ता है या तो परिस्थितियों से या पूर्व-सस्कारों से । परिस्थितियों से गिरनेवाला मनुष्य उन परिस्थितियों का त्याग करने हो से बच सकता है, संस्कारों से गिरनेवाले मनुष्य का मार्ग इससे कहीं कठिन है। आपकी आत्मा सुन्दर और पवित्र है, केवल परिस्थितियों ने उसे कुहरे को भौति ढंक लिया है। अब विवेक का सूर्य उदय हो गया है, ईश्वर ने चाहा तो कुहरा भी फट जायगा। लेकिन सबसे पहले उन परिस्थितियों का त्याग करने को तैयार हो जाइए। मिस जोशी-यही आपको करना होगा। आपटे ने चुभती हुई निगाहों से देखकर कहा-वैद्य रोगी को जबरदस्ती दवा पिलाता है। मिस जोशी-मैं सब कुछ कऊँगो। मैं कड़वी से कड़वी दवा पिऊँगो, यदि आप पिलायेंगे। कल आप मेरे घर आने को कृपा करेंगे, शाम को ? आपटे-अवश्य आऊँगा। मिस जोशी ने विदा होते हुए कहा -भूलिएगा नहीं, मैं आपकी राह देखती रहूंगी। अपने रक्षक को भी लाइएगा। यह कहकर उसने पालक को गोद में उठाया और उसे गले से लगाकर बाहर निकल आई। गर्व के मारे उसके पांव जमीन पर न पढ़ते थे। मालूम होता था, इवा में उड़ी जा रही हूँ। प्यास से तड़पते हुए मनुष्य को नदी का तट नजर आने लगा था। . दूसरे दिन प्रातःकाल मिस जोशी ने मेहमानों के नाम दावतो कार्ड भेजे और उत्सव मनाने की तैयारियां करने लगी। मिस्टर आपटे के सम्मान में पार्टी दी जा रही थी। मिस्टर जौहरी ने कार्ड देखा तो मुसकिराये। अब महाशय इस जाल में बचकर कहां जायेंगे ? मिस जोशी ने उन्हें फंसाने को यह अच्छी तरकीब निकाली। इस काम में निपुण मालूम होती है । मैंने समझा था, आपटे चालाक आदमी होगा, मगर इन आन्दोलनकारी विद्रोहियों को बकवास करने के सिवा जौर क्या सूमा - सकता है।