पृष्ठ:मानसरोवर भाग 3.djvu/२२५

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. . 8 एक ने होलो छेड़ी, दूसरे ने सुर मिलाया। गाना होने लगा। नूरमली ने ढोक मोर लाकर रख दिया। वहीं मजलिस जान गई। गाते गाते एक उठकर नाचने लगा। दुसरा उठा। यहां तक कि सम-के-सब कमरे में चौकड़ियां भरने लगे। हु-हक मचने लगा। कबोर, फाग, चौताल, गाली-गलौज, माह-पीट बारी-बारी सबका नम्बर पाया । सब ऐसे निडर हो गये थे, मानौ अपने घर में हैं । कुरसिया उलट गई। दोवारों पर की तसवोर टूट गई। एक ने मेज़ उलट दो। दूसरे ने रिकारियों का गेंद बनाकर उछालना शुरू किया। यहाँ यही हंगामा मचा हुआ था कि शहर के एई लाला उजागरमल आगमन हुभा । उन्होंने यह कौतुक देखा तो चकराये। खानसामा से पूछा- यह क्या गोलमाल है शेखजी, साइव देखेंगे तो क्या कहेंगे ? नूरमलो -साहब का हुक्म हो ऐछा है तो कोई क्या करे। आज उन्होंने अपने नौकरों को दावत की है, इनसे होलो खेलने को भी कहा है । सुनते है, लाट साहब के यहाँ से हुक्म आया है कि रिया के साथ खूष रन्त जब्त रखो, उनके त्यौहारों में शरोक हो। तभी तो यह हुक्म दिया है, नहीं तो इनके मिशाल ही न मिलते थे। आइए, तशरीफ रखिए। निकालूं कोई मजेदार चीज ? अभी हाल में विलायत से पारसल आया है। राय उजागरमल बड़े उदार विचारों के मनुष्य थे। अंगरेजो दावों में मेधड़क शरीक होते थे, रहन-सहन भो अँगरेको हो था, और यूनियन क्लब के तो वह एक- मात्र कर्ता ही थे। अंगरेजों से उनकी खूब छनतो है और मिस्टर क्रास तो उनके परम मित्र ही थे। जिलाधीशसे, चाहे वह कोई हो, सदेष उनकी घनिष्ठता रहतो थी। नूरअली को बातें सुनते ही एक कुर्सी पर बैठ गये और बोले-अच्छा !- यह बात है। हां तो फिर निकालो कोई मजेदार चीज, कुछ ग्रन भी हो। नूरअलो-हजूर, आप के लिए सब कुछ हाजिर है। लाला साहब कुछ तो घर हो से पीकर चले थे, यहां कई गिलास चढ़ाये तो जवान लड़खाते हुए बोले- क्यों नूरअलो, माज साहब होली खेलेंगे ? नूरअलो-जी हाँ। उजागर-लेकिन मैं रज-पज तो लाया ही नहीं। मेजो चटपट किसी को मेरी .