पृष्ठ:मानसरोवर भाग 3.djvu/४६

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उद्धार देखना नसोब हुमा । ईश्वर उन्हें सद्गति दें। वह आदमी नहीं देवता थे, जिन्होंने मेरे कल्याण के निमित्त अपने प्राण तक समर्पण कर दिये । पति ने पूग दरबारीलाल तुम्हारे बचा हैं ? अम्बा-हाँ। पति-इस पत्र में हजारीलाल का नाम लिखा है, यह कौन हैं ? अम्बा- यह मुन्शी दरबारीलाल के बेटे हैं ? पति-तुम्हारे चचेरे भाई ? अम्बा-नहीं, मेरे परम दयाल उद्धारक, जीवनदाता, मुझे अथाह जल में डूबने से बचानेवाळे मुझे सौभाग्य का वरदान देनेवाले। पति ने इस भाव से कहा मानो कोई भूली हुई बात याद आ गई हो-अहा ! मैं समझ गया । वास्तव में वह मनुष्य नहीं, देवता थे।